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Wednesday, 6 March 2019

राजस्थान में स्थित भानगढ़ किले को भूतिया जगह क्यों घोषित किया गया है? इसके पीछे क्या कहानी है?

  Dilip Yadav       Wednesday, 6 March 2019
भानगढ़ का किला हमारे कॉलेज से मात्र 1 घंटे की ही दूरी पर था , पर इसकी भूतिया बातें सुन -सुन कर ही इसके दर्शन मात्र हो गए, कभी जाने की हिम्मत ही नहीं हुई, हालाँकि मेरे कुछ मित्र कई बार जा चुके है वहां (सिर्फ दिन में ही) उन लोगों ने बताया कि दिन में यहां सब एकदम सामान्य है रात का पता नहीं |
राजस्थान के बारे में सुनते ही ज़हन में रेतीले टीले, रंग-बिरंगे पारम्परिक परिधान पहने हुए लोग आ जाते है, इस भूमि को वीरों की भूमि कहा जाता है, भारत के इतिहास में राजस्थान के राजपुताने की अलग ही शान है, राजस्थान कई चीज़ों के लिए प्रसिद्ध है,यह कई महान योद्धाओं की जन्भूमि भी रह चूका है | राजाओं की धरती कहे जाने वाला राजस्थान अपनी संस्कृति, खान- पान,वेशभूषा, आभूषण, हवेलियों, धार्मिक मंदिर व कई डरावनी जगहों के लिए भी जाना जाता है |
राजस्थान की दो प्रसिद्ध डरावनी जगह-
1. भानगढ़ का किला, अलवर
2. कुलधरा गांव, जैसलमेर
हिंदी फिल्म "कालो" राजस्थान की ऐसी डरावनी जगह कुलधरा गांव पर बनी है |
अब आते है मूल सवाल पर -
भानगढ़- राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का के जंगलों से घिरा हुआ भानगढ़ आज भी खुद में कई रहस्य समेटे खड़ा है। इसके बनने और खंडहर होने के कई किस्से इतिहास की किताबों में दफन है।
पुराने किले, मौत, हादसों, अतीत और रूहों का अपना एक अलग ही सबंध और संयोग होता है। ऐसी कोई जगह जहां मौत का साया बनकर रूहें घुमती हो उन जगहों पर इंसान अपने डर पर काबू नहीं कर पाता है और एक अजीब दुनिया के सामने जिसके बारें में उसे कोई अंदाजा नहीं होता है, अपने घुटने टेक देता है। दुनिया भर में कई ऐसे पुराने किले है जिनका अपना एक अलग ही काला अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास है।
भानगढ़ के किले की भी कुछ ऐसी ही कहानी है | भानगढ़ समय के साथ एक उजड़ा हुआ किला, लेकिन इसकी चारदीवारी में इतिहास, मान्यताओं के साथ अफवाहों के न जाने कितने किस्से बिखरे हुए हैं। हर मौसम में ये किला रंग बदलता है। भीषण गर्मियों में इसका उजाड़पन डराता है, तो बारिश की बूंदों से नहाने के बाद ये हरियाली की चादर ओढ़ लेता है।
किवदंतियों के भंवर में डूबे इस उजाड़ का नाम आसपास रहने वालों के लिए 'भूतों का भानगढ़' है। सैकड़ों साल हो गए, शायद ही कोई व्यक्ति भानगढ़ में रात को ठहरने की हिम्मत कर सका हो। कहा जाता है कि एक बार एक अंग्रेज अपने एक वनकर्मी के साथ रात को इस गढ़ की हकीकत जानने के लिए रुका था और सुबह दोनों मृत मिले थे। तभी से सरकार ने सूचना पट्ट लगवाकर भानगढ़ में रात में किसी के भी यहां रुकने पर पाबंदी लगा दी।
भानगढ़ किले का निर्माण 1573 में आमेर के महाराजा भगवंतदास ने करवाया था | उजाड़ होने के पूर्व यह किला लगभग 300 वर्षों तक आबाद रहा रहा | महाराज भगवंतदास के कनिष्ठ पुत्र मानसिंह थे, जो मुग़ल बादशाह अकबर के नवरत्नों में सम्मिलित्त थे| उनके भाई माधो सिंह ने 1613 में इस किले को अपनी रिहाईश बना लिया |उनके तीन पुत्र थे – सुजान सिंह, छत्र सिंह और तेज सिंह. माधोसिंह की मृत्यु के उपरांत भानगढ़ किले का अधिकार छत्र सिंह को मिला. छत्रसिंह का पुत्र अजबसिंह था| अजबसिंह ने भानगढ़ को अपनी रिहाइश नहीं बनाया| उसने निकट ही अजबगढ़ बसाया और वहीं रहने लगा. उसके दो पुत्र काबिल सिंह और जसवंत सिंह भी अजबगढ़ में ही रहे, जबकि तीसरा पुत्र हरिसिंह 1722 में भानगढ़ का शासक बना|
भानगढ़ के उजाड़ होने की कहानी - भानगढ़ के उजाड़ होने के संबंध में दो कहानियाँ प्रचलित है |
1.योगी बालूनाथ के श्राप की कहानी - पहली कहानी के अनुसार जहाँ भानगढ़ किले का निर्माण करवाया गया, वह स्थान योगी बालूनाथ का तपस्थल था| उसने इस वचन के साथ महाराजा भगवंतदास को भानगढ़ किले के निर्माण की अनुमति दी थी कि किले की परछाई किसी भी कीमत पर उसके तपस्थल पर नहीं पड़नी चाहिए| महाराजा भगवंतदास ने तो अपने वचन का मान रखा, किंतु उसके वंशज माधोसिंह इस वचन की अवहेलना करते हुए किले की ऊपरी मंज़िलों का निर्माण करवाने लगे| ऊपरी मंज़िलों के निर्माण के कारण योगी बालूनाथ के तपस्थल पर भानगढ़ किले की परछाई पड़ गई | ऐसा होने पर योगी बालूनाथ ने क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि यह किला आबाद नहीं रहेगा | उनके श्राप के प्रभाव में किला ध्वस्त हो गया|
2. राजकुमारी रत्नावति और तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की कहानी- इस कहानी के अनुसार भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावति बहुत रूपवति थी| उसके रूप की चर्चा पूरे भानगढ़ में थी और कई राजकुमार उससे विवाह करने के इच्छुक थे| उसी राज्य में सिंधु सेवड़ा नामक एक तांत्रिक रहता था| वह काले जादू में पारंगत था| राजकुमारी रत्नावति को देखकर वह उस पर आसक्त हो गया | वह किसी भी सूरत में राजकुमारी को हासिल करना चाहता था| एक दिन राजकुमारी रत्नावति की दासी बाज़ार में उनके लिए श्रृंगार का तेल लेने गई| तब तांत्रिक सिंधु सेवड़ा ने तांत्रिक शक्तियों से उस तेल पर वशीकरण मंत्र प्रयोग कर रत्नावति के पास भिजवाया| उसकी योजना थी कि वशीकरण के प्रभाव से राजकुमारी रत्नावति उसकी ओर खिंची चली आयेंगी| लेकिन राजकुमारी रत्नावति तांत्रिक का छल समझ गई और उसने वह तेल एक चट्टान पर गिरा दिया| तंत्र विद्या के प्रभाव में वह चट्टान तीव्र गति से तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की ओर जाने लगी| जब तांत्रिक ने चट्टान से अपनी मौत निश्चित देखी, तो उसने श्राप दिया कि भानगढ़ बर्बाद हो जायेगा| वहाँ के निवासियों की शीघ्र मौत हो जायेगी और उनकी आत्माएं सदा भानगढ़ में भटकती रहेंगी| वह चट्टान के नीचे दबकर मर गया | इस घटना के कुछ दिनों बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ में युद्ध हुआ और उस युद्ध में भानगढ़ की हार हुई| युद्ध उपरांत पूरा भानगढ़ तबाह हो गया. वहाँ के रहवासी मर गए, राजकुमारी रत्नावति भी बच न सकी | उसके बाद भानगढ़ कभी न बस सका|
आज यह किला जीर्ण-शीर्ण स्थिति में उजाड़ पड़ा हुआ है | लोगों की माने तो यहाँ से रात में किसी के रोने और चिल्लाने की तेज आवाजें आते हैं| कई बार यहाँ एक साये को भी भटकते हुए देखने की बात कही गई है| पुरातत्व शास्त्रियों ने भी खोज-बीन के बाद इस किले को असामान्य बताया है|
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