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Monday, 4 March 2019

पश्चिमी लोगों के पास यात्रा करने के लिए पैसे कहाँ से आते है?

  Dilip Yadav       Monday, 4 March 2019
भारत की तरह पश्चिमी देशों में युवाओं का एक बहुत बड़ा तबक़ा पढ़ाई के तुरंत बाद नियमित नौकरियाँ करने में विश्वास नहीं रखता। जहाँ भारत में आम युवा का पढ़ाई के बाद एकमात्र उद्देश्य नौकरी लेना और शादी करके परिवार बसाना ही हो जाता है, वहाँ दूसरी और पश्चिमी देशों में युवा अपना “Passion” एक्सप्लोर करते हैं, अपने सपने पूरे करते हैं, नये उद्दमों की शुरुआत करते हैं, संसार-भ्रमण करते हैं, सफल-असफल होते है, और इन सबके बाद शादी के बारे में सोचते हैं। उनमें से बहुत के पास युवावस्था में परिवार के साथ रहने की कोई बाध्यता नहीं होती। बहुत से लोग घर से निकल कर अपनी पढ़ाई भी ख़ुद से छोटें-मोटें पार्ट-टाईम रोज़गारों द्वारा पूरी करते हैं।
मेरी थाईलैंड यात्रा के दौरान बैंकॉक शहर में मुझे बहुत से विदेशी युवा पर्यटकों से बातचीत करने का मौक़ा मिला। एक 28 वर्षीय अविवाहित युवती जो मूलरूप से फ़िलिपींस की रहने वाली थी और पट्टाया शहर में पार्ट-टाइम इंग्लिश टीचर बनकर अलग-अलग देश घुम रही थी (उसने ये भी बताया की उसके सारे भाई-बहन अलग अलग देशों में है), एक बोलीविया का 31 वर्षीय अविवाहित युवक जो एक फ़्री-लांसर सोफ़्टवेयर इंजीनियर था और संसार-यात्रा पर निकला था, एक 30 वर्ष का अमेरिकी अविवाहित युवक जो दिन-भर अपने लेपटोप से कनेक्ट होकर Programming कर रहा था और शाम को मेरे साथ समुन्दर-किनारे घूम रहा था और रात को पार्टी कर रहा था। लगभग सभी पर्यटक 25–35 आयु-वर्ग के फ़्री-लांसर ही थे, अविवाहित थे, और वो जो अपने देश में 4–5 महीने नौकरी करके पैसा इकट्ठा करते थे और फिर दूसरे देशों में यात्रा पर निकल जाते थे। वहीं पर एक मैं 24 वर्षीय अविवाहित भारतीय सोफ़्टवेयर इंजीनियर था जो बस कुछ हफ़्तों के लिए दूसरे देश में था और जिसको वापस जाकर वही इन्फ़ोसिस लिमिटेड की नौकरी करनी थी। इस पर भी घरवाले शादी के लिये लगातार दबाव बना रहे थे। मैं अपनी ज़िंदगी को ऊपर बतायें दूसरे देशों के लोगों में से किसी एक के जैसा भी होने का सोच ही नहीं सकता था। मैं ही क्यूँ, क्या भारत का कोई भी आम युवा सोच सकता है?
पट्टाया सिटी में मेरे साथ ऐसे ही कुछ ‘बेफ़िकरे’ दोस्त - (फ़िलोसोफ़ी: शादी-ब्याह, नौकरी, बच्चें, घर-परिवार.. सब कुछ बाद में; पहले पैसा इकट्ठा करो और दुनिया घूमने चलों)
[फ़ोटो में मैं 24 साल का सबसे बाँयी तरफ़ खड़ा हुआ लड़का]

यात्रा करने के लिए उन्हें ज़्यादा आर्थिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है- उनकी करेंसी की मज़बूती। एक अमेरिकी युवा किसी रेगुलर नौकरी में अगर 3500 डॉलर हर महीने कमायें (Bureau of Labor Statistics की रिपोर्ट के अनुसार), तो 1 साल की नौकरी में उसकी कुल कमायी लगभग 42,000 डॉलर होगी। अगर टेक्स और उसके ख़ुद के ख़र्चे को हटाकर 20,000 डॉलर भी बचत मान ले, और यें आदमी भारत घुमने आ जायें तो इसके पास ख़र्च करने के लिए लगभग 20,000x70= 14,00,000/- INR यानी 14 लाख रुपये होंगे। तो एक आम अमेरिकी नागरिक के बैग को अगर टटोल कर देखें तो उसमें से इतनी भारी मात्रा में कैश निकलेगा। भारत में इतना कैश, इतना कैश आपको अमीर, बहुत अमीर बना सकता है। घूमना पड़ेगा सस्ता। देश में कमाना छोड़िये, अभी।
इसके अलावा कुछ देशों में बेरोज़गारी भत्ते का भी प्रावधान है। वहाँ की सरकार सभी युवाओं को नौकरी ना मिलने तक बेरोज़गारी भत्ता देती है। बेरोज़गारी भत्ते के रूप में मिले ये डॉलर और यूरो भारत जैसे विकासशील देश में आकर लाखों रुपये बन जाते हैं। बहुत से विदेशी युवक इसी भत्ते की बदोलत साल में कई महीने दूसरे देशों में जाकर बिता देते हैं। इस प्रकार यह भत्ता भी उनकी यात्रा हेतु आर्थिक प्रबंधन का प्रमुख अंग है|
मेरा और भी लिखने का मन है लेकिन चलिए कम शब्दों में ख़त्म करते है। मुझे उम्मीद हैं की इस जवाब से आप सहमत होंगे।
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Thanks for reading पश्चिमी लोगों के पास यात्रा करने के लिए पैसे कहाँ से आते है?

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